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उत्तराखंड

रास्ते के विवाद में उलझा सैन्य धाम

सीएम ने डीएम व सचिव सैनिक कल्याण को सौंपी समाधान की जिम्मेवारी

देहरादून। उत्तराखंड का पांचवा धाम सैन्यधाम निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही रास्ते के विवाद में उलझ गया है। अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यथाशीघ्र इस विवाद को सुलझाने के लिए सचिव सैनिक कल्याण विभाग और जिला अधिकारी को निर्देश दिए हैं ताकि 15 दिसंबर से पूर्व बिना किसी विवाद के सैन्य धाम का निर्माण कार्य शुरू हो सके।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तराखंड में पांचवा धाम सैन्यधाम की घोषणा की थी। जिसे अब जमीन पर उतारने में भाजपा सरकार जुटी हुई है। सरकार द्वारा सैन्य धाम के लिए जिस जमीन को चिन्हित किया गया था उस तक पहुंचने का मार्ग बहुत संकरा है जिस पर बड़े वाहनों का आवागमन भी संभव नहीं है। इस मार्ग को अगर 60—65 फिट चौड़ा बनाया जाए तो इसमें कुछ बिल्डर्स की जमीन आती है। बिल्डर्स रास्ता देने को तो तैयार हैं लेकिन उनकी शर्त है कि इस रास्ते का उपयोग वह भी करेंगे तथा इसकी अनुमति उन्हें दी जानी चाहिए। जबकि सरकार सैन्यधाम के रास्ते को सरकारी मार्ग के रूप में इस्तेमाल करना चाहती है न कि सार्वजनिक मार्ग के रूप में। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि 15 दिसंबर को सैन्य धाम निर्माण कार्य शुरू होना है लेकिन रास्ते को लेकर विवाद बना हुआ है। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी का कहना है कि यह अति महत्व का काम है इसलिए इसका निर्माण दिव्य व भव्य होना चाहिए। उन्होंने हालांकि समाधान की उम्मीद तो जताई है लेकिन अगर समाधान न हुआ तो मामला अदालत तक भी जा सकता है जबकि भाजपा लंबे समय से सैन्यधाम का प्रचार—प्रसार और शहीदों के आंगन की मिटृी इकठ्ठा करने में जुटी हुई है। मुख्यमंत्री ने अब इसके समाधान की जिम्मेवारी डीएम व सैनिक कल्याण विभाग के सचिव को सौंपी है। देखना होगा कि समय रहते इसका क्या हल निकल पाता है।

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